स्वामी सेवक और समाज
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सेवक, स्वामी, और समाज
समाज का वास्तविक उत्थान केवल नियमों और कर्तव्यों के पालन से नहीं होता, बल्कि तब होता है जब हर व्यक्ति अपनी भूमिका से थोड़ा आगे बढ़कर देने की भावना रखता है। जब सेवक (या कर्मी) केवल अपने दायित्वों तक सीमित न रहकर अपने स्वामी (या संस्था/समाज) के लिए कुछ अतिरिक्त प्रयास करता है—ईमानदारी, लगन और… Continue reading
